हिन्दुस्तान ने पहली बार बच्चो से नहीं बच्चो के लिए सवाल पूछे – Shiksha Shetra
हिन्दुस्तान ने पहली बार बच्चो से नहीं बच्चो के लिए सवाल पूछे

हिन्दुस्तान ने पहली बार बच्चो से नहीं बच्चो के लिए सवाल पूछे

दुनिया के हर क्षेत्र की तरह शिक्षा क्षेत्र पर भी कोरोना की गाज गिरी है। जिस से बच्चे तो बच्चे, माँ-बाप भी भविष्य को लेकर चिंतित है। भले ही डिजिटल दौर में पढाई से जुडी कई मुश्किलें हल हो गयी हैं पर राह अभी भी आसान नहीं है। शिक्षा क्षेत्र से जुडी ऐसी कई बातों को ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान ने 24 जुलाई को शाम 6 बजे एक वेबिनार “इम्पैक्ट एंड वे फॉरवर्ड” का आयोजन किया, जिसकी प्रशंसा न सिर्फ देखने वाले बल्कि इसमें शिरकत करने वाले स्पीकर्स ने भी की |इस वेबिनार के मॉडरेटर थे विकास कुमार, जो की झारखंड-बिहार क्षेत्र के जाने माने कैरियर काउंसलर है|

इस वेबिनार के पैनल में थे,

 प्रोफेसर प्रमोद पाठक ,मैनेजमेंट प्रोफेसर,आईआईटी-आईएसएम, धनबाद

 डॉ रमेश कुमार पांडे ,वाईस चांसलर,रांची यूनिवर्सिटी

 प्रोफेसर उज्जवल कुमार चौधरी , प्रो- वाईस चांसलर एंड डीन,एडमास यूनिवर्सिटी

 प्रोफेसर प्रदीप के. जैन ,डायरेक्टर ,नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी,पटना

हिन्दुस्तान द्वारा आयोजित इस वेबिनार में, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे गए ,जैसे & पेंडेमिक से कैसे लड़ा जा सकता है? बच्चे इस परिस्तिथि में क्या करें? पेरेंट्स के लिए क्या मार्गदर्शन है? बच्चे कैसे कोप अप करें? इत्यदि। पैनेलिस्ट ने इन सबके साथ वेबिनार से लाइव जुड़े छात्रों के सवालों का भी जवाब दिया। हमें उम्मीद है, की इनके मार्गदर्शन से बच्चों और पेरेंट्स,दोनों में उम्मीद की किरण जगी होगी। हमारे पैनलिस्टों ने वेबिनार में क्या कहा,आइये आपको बताते हैं |

डॉक्टर रमेश कुमार पांडे

उन्होंने बताया की विश्वविद्यालय स्टूडेंट्स की समस्याओं का निदान करने के लिए तत्पर है| उसी का परिणाम है कि रांची विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन क्लासेज कंडक्ट करवाएं जिसकी वजह से 40 विषयों का रिजल्ट प्रकाशित किया गया|

1000 से भी ज्यादा लेक्चर्स कम्युनिटी रेडियो के माध्यम से कंडक्ट कराये गए| लेक्चर्स यूट्यूब के माध्यम से भी स्टूडेंट्स के लिए उपलब्ध हैं| लॉकडाउन कि अवधि में स्टूडेंट्स की परीक्षाएं विभिन्न संसाधनों और सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया है| गूगल फॉर्म के माध्यम से परीक्षाएं कंडक्ट कराई हैं और उसके माधयम से अब रिजल्ट निकलने जा रहे हैं|

समय-समय पर UGC , MHRD तथा राज्य सरकार और महामहीम से जो भी निर्देश प्राप्त हुए हैं, वो उनका पालन कर रहे हैं| उनका लक्ष्य क्वालिटी एजुकेशन देने का है| इसके लिए वो बेस्ट कोर्सेज दे रहे हैं ताकि आउटकम बेस्ट एजुकेशन (OBE) हो और जिसमें गैप की सुविधा हो| पूरे झारखण्ड में ये प्रयोग किया जा रहा है और इसमें रांची विश्वविधालय प्रमुख रूप से अपनी भूमिका निभाने जा रहा है| उन्होंने परीक्षाओं के विलम्ब होने के कारण मानसिक रूप से परेशान विद्यार्थियों को चिंता न करने की सलाह देते हुए कहा कि विश्ववद्यालय लगातार उनकी समस्याओं पर नज़र रखे हुए है|

साथ ही उन्होंने कहा कि घबराने कि जरुरत नहीं है क्यूंकि हर विपरीत परिस्तिथि एक अवसर प्रदान करती है और ये खुद को आज़माने का और नयी बुलंदियों तक ले जाने का एक अवसर है| UGC और MHRD द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रस्ताव के अनुसार अगस्त महीने से वो परीक्षाओं का आयोजन करने जा रहे हैं| उन्होंने सभी विद्यार्थियों से कहा कि सितम्बर महीने में सोशल डिस्टन्सिंग और सभी नियमों का पालन कर वो एक्ज़ाम्स कंडक्ट कर आगे के सेशंस को रेगुलर करने का प्रयास करेंगे| अंत में उन्होंने सेशंस में हो रही देरी में सुधार लाने की बात कही| साथ ही उन्होंने कहा कि वो झारखण्ड एजुकेशनल ग्रीड की स्थापना करने जा रहे हैं, जिसके माध्यम से सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजेस जुड़ेंगे और नयी सुचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके विद्यार्थियों को शिक्षा देंगे|

प्रोफेसर प्रमोद पाठक

जो आज की स्तिथि है उसमें दो मूल मुद्दों पर उन्होंने कोशिश की है| दो मूल मुद्दे हैं ऑनलाइन क्लासेज और ऑनलाइन लर्निंग| उनके मुताबिक कई जगह लोग इन दोनों को मिक्स अप कर देते हैं| ऑनलाइन क्लासेज और ऑनलाइन लर्निंग में फर्क है| ऑनलाइन क्लासेज की समस्या ये है कि कनेक्टिविटी हर वक़्त संभव नहीं होती है| इसलिए ऑनलाइन क्लासेज के साथ-साथ ऑनलाइन लर्निंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है| ऑनलाइन लर्निंग कि ख़ास बात ये है कि ऑनलाइन क्लासेज नहीं चल पा रही हैं, तो ऑनलाइन रिसोर्सेज को शेयर करके वो उनको बैकअप प्रदान करती है विद्यार्थी को ज्यादा नुक्सान नहीं होता है| अकादमिक सत्र को चलाने का एक नया मॉडल डेवेलोप करना पड़ेगा और ये मॉडल डिजिटिलाइजेशन के रास्ते से जाता है| लेकिन इसके साथ ही हमें ये भी गौर करना होगा कि जो डिजिटिलाइजेशन कि प्रतिक्रिया है उसके लिए अभी काफी तैयारी की आवश्यकता है|

इसके लिए हमें एक दूसरे और काफी प्रचलित मॉडल ओपन यूनिवर्सिटी मॉडल का सहारा लेना पड़ेगा| इसके माध्यम से हम लोगों ने उन छात्रों तक शिक्षा पहुंचे है जो रेगुलर क्लासेज नहीं अटेंड कर पा रहे हैं| आज की जो स्तिथि है उसमें उसका भी सहारा लेना पड़ेगा और जो फोकस होगा वो इस बात पर होगा कि पहले जब क्लास्सरूम्स में पढाई होती थी तो टीचर सेंट्रिक मॉडल होता था| लेकिन, टीचर सेंट्रिक मॉडल में टीचर और स्टूडेंट के बीच इंटरैक्शन ज्यादा होता था| जबकि ऑनलाइन मोड में इसकी संभावना बिलकुल नहीं है| तो ये लर्नर सेंट्रिक मॉडल होगा और स्टूडेंट को खुद भी थोड़ा मेहनत करनी पड़ेगी| उन्होंने कहा कि ये एक तरह का युद्ध है| युद्ध कि सबसे बड़ी बात होती है कि जो सेना शांति के दिनों में तैयार रहती है, वो युद्ध के दिनों में काम खून बहाती है| साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी तैयारी पूरी रखनी है| उन्होंने कहा , फ़ौज की तरह रिहर्सल, प्रैक्टिस और तैयारी जारी रखिये टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ी की तरह विकेट पर टिके रहने की मानसिकता को बनाये रखने की जरुरत है|

प्रोफेसर उज्जवल कुमार चौधरी टीचर और मेंटर अलग-अलग कांसेप्ट हैं| टीचर वो होता है जो क्लासरूम में पढ़ाता है, परीक्षा लेता है, एग्जामिन करता है-ये मॉडर्न कॉन्सेप्ट्स में वेलिडेटेड नहीं हैं| वहीँ, मेंटर वो हैं जो क्लास के अंदर और बाहर दोनों जगह गाइड करता है , प्रेज़ेन्स और अपसेंस दोनों में गाइड करते है| जब स्टूडेंट ऑनलाइन लर्निंग करेंगे तो मेंटर बहुत सारी चीज़ों को अग्ग्रीगेट करके ऑनलाइन भेजेंगे | दो तरह के लर्निंग रिसोर्सेज होते हैं| एक होता है प्रोपराइटरी जिसमें वीडियो, पॉवरपॉइंट और केस स्टडी जिसे टीचर खुद ही तैयार करता है|

दूसरा होता है अग्रीगेटेड जो कि आलरेडी ओपन सोर्सेस में अवेलेबल है|यूट्यूब में बहुत से कॉन्सेप्चुअल वीडियोस हैं| जो चीज़ टीचर पढ़ाते हैं, उसकी वीडियोस अवेलेबल हैं| इसके अलावा बहुत सारे केस स्टडी अवेलेबल हैं| उन्होंने बताया की कॉलेज में , इन दोनों लर्निंग रिसोर्सेज को ऑनलाइन क्लास में बच्चों से मिलने से 4-5 दिन पहले ही भेज दिया जाता है और उनसे पढ़ने, देखने और सुनने के लिए बोला जाता है| पॉडकास्ट के जरिये बच्चे उसे सुनते हैं, वीडियोस के माध्यम से उसे देखते और पॉवरपॉइंट, पीडीऍफ़ या स्टडी मटेरियल है तो उसे पढ़ना पड़ता है|

अब बच्चे ब्लेंक माइंड के साथ नहीं बल्कि इन अग्ग्रीगेटेड एंड प्रोपेराइटोरी लर्निंग रिसोर्सेज के साथ माइंड को प्रिपेयर करके आते हैं| इसी को हम बोलते हैं मैसिव ऑनलाइन कोर्स | UGC और CBSE कि तरफ से 2-4 ऑनलाइन कोर्सेज आ चुके हैं| उन्होंने कहा की हमारे एबिलिटीज,स्किल्स और हुनर में बदलाव लाने कि जरुरत है| बच्चों को अपने मन से डर को निकालने की जरुरत है | फिजिकल क्लास में बच्चे बिना तैयारी के जा सकते थे लेकिन ऑनलाइन क्लास में ऐसा नहीं है|

फिजिकल क्लास में बच्चे अपने माइंड से कहीं और एंगेज हो सकते थे, लेकिन ऑनलाइन क्लास में बच्चों को मेंटली प्रेजेंट होना ही पड़ेगा| टीचर्स को भी लर्निंग रिसोर्सेज पर वीडियोस बनाना , हर सब्जेक्ट पे ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन और एनीमेशन को डाउनलोड करना, जिस भी टॉपिक पर पढ़ा रहे हैं उसके बहुत से लर्निंग रिसोर्सेज को डाउनलोड करना, केस स्टडी को डाउनलोड करना, स्टोरी टेलिंग कैपेसिटी बहुत जरुरी है| स्टूडेंट्स क्लासरूम में पढ़ते हैं लेकिन लर्नर क्लासरूम और उसके बाहर भी पढ़ते हैं| स्टूडेंट्स केवल मार्क्स और डिग्री के लिए पढ़ते हैं, लेकिन लर्नर ज़िंदगी में प्रोवोक के लिए पढ़ते हैं|

इसके लिए पुराने टीचर्स को नए तरीके से स्कूलिंग करना बहुत जरुरी है| प्रोफेसर प्रदीप के जैन छोटे बच्चों को 2-3 घंटा छोटे स्क्रीन पर पढ़ना काफी स्ट्रेस्फुल होता था| लेकिन इसका कोई अल्टरनेटिव भी नहीं था| इसलिए पूरी तरीके से घर पर बैठने से अच्छा था कि स्कूल कॉलेजेस उन बच्चों को जितना हो पढ़ा पाएं| लॉकडाउन के बाद बात ये सामने आयी कि काफी जगह उस टाइम एग्ज़ॅम्स नहीं हुए थे और कोर्स भी बीच में था| आजकल ये डिस्कशन बना हुआ है कि बच्चों का एग्जाम लिया जाए या एवरेज मार्क्स देके प्रमोट कर दिया जाए| उन्होनें कहा प्रमोशन से अच्छा है, हम लोग ऑनलाइन एग्ज़ाम्स करें|

जहाँ तक बात गाँव देहात के स्टूडेंट्स की है तो वहां पर भी अगर वो ओपन बुक सिस्टम के तहत ऑफलाइन एग्जाम करते हैं तो कोई समस्या नहीं होगी,उन्होंने खुद अपने कॉलेज में ये किया हुआ है| यदि बाकि स्कूल्ज और कॉलेजेस भी ये चीज़ अपनाते हैं तो कोई हर्ज़ नहीं है| उन्होंने कहा कि हमें ऑनलाइन एग्जामिनेशन सिस्टम में जाना चाहिए| साथ ही उन्होंने कहा कि हमें कुछ अर्रेंजमेंट्स कि जरुरत है जिससे फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ क्लासेज भी चलती रहें| बच्चों के साथ-साथ टीचरों को भी ऑनलाइन क्लासेज लेने के लिए एडुकेट करने कि जरुरत है और स्कूल कॉलेजेस को भी क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए अपनी फैसिलिटीज बढ़ानी पड़ेगी| ये सिस्टम आने वाले समय में हमारे एजुकेशन सिस्टम को बढ़ाएगा और सुदृण बनाएगा|

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